बरेली नाथ नगरी : सावन में शिवभक्तों का उमड़ा सैलाब, जानें 7 प्राचीन नाथ मंदिरों का इतिहास । आस्था-विश्वास की अनूठी डगर, ये है नाथ मंदिरों का शहर सावन में बरेली (नाथ नगरी) के 7 प्राचीन शिव मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ता है। जानिए अलखनाथ, त्रिवटीनाथ समेत इन मंदिरों का पौराणिक इतिहास। बरेली,

बरेली नाथ नगरी : सावन में शिवभक्तों का उमड़ा सैलाब, जानें 7 प्राचीन नाथ मंदिरों का इतिहास ।
आस्था-विश्वास की अनूठी डगर, ये है नाथ मंदिरों का शहर सावन में बरेली (नाथ नगरी) के 7 प्राचीन शिव मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ता है। जानिए अलखनाथ, त्रिवटीनाथ समेत इन मंदिरों का पौराणिक इतिहास। बरेली, नाथ मंदिरों की श्रंखला होने की वजह से बरेली नाथ नगरी के नाम से विख्यात है। प्राचीन मंदिरों में पूरे साल भुक्तों का मेला लगा रहता है मगर पवित्र श्रावण मास में भगवान शिव के जलाभिषेक को लेकर आस्था का सैलाब उमड़ता है। शिवभक्त कांवड़िये कछला और हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर बम-बम भोले के उद्घोष करते हुए नाथनगरी पहुंचते हैं और नाथ मंदिरों में भगवान भोले का जल अभिषेक करते हैं। बाबा अलखिया के नाम से अलखनाथ मंदिर किला क्षेत्र में स्थित अलखनाथ मंदिर लगभग 926 वर्ष पुराना माना जाता है। यह मंदिर बाबा अलखनाथ को समर्पित है, जो नाथ संप्रदाय के प्रमुख संत थे। कहा जाता है कि मुगलकाल में, जब सनातन संस्कृति पर संकट था, तब बाबा अलाखिया ने यहां आकर भगवान शिव की कठोर तपस्या की और शिवलिंग की स्थापना की। उनकी तपस्या के प्रभाव से मुस्लिम शासक इस क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सके। आज भी, मंदिर परिसर में मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है। मान्यता है कि यहां 40 दिनों तक जल चढ़ाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर परिसर में 51 फीट ऊंची हनुमान जी की मूर्ति भी स्थित है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। वनखंडीनाथ को नष्ट नहीं कर सके मुगल जोगी नवादा क्षेत्र में स्थित वनखंडीनाथ मंदिर का संबंध महाभारत काल से है। मान्यता है कि पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। उस समय यह क्षेत्र घने वनों से घिरा था और गंगा नदी यहां से बहती थी। मुगल शासकों ने इस मंदिर को नष्ट करने का प्रयास किया, लेकिन शिवलिंग को कोई क्षति नहीं पहुंची। यह मंदिर भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है।
महाभारत काल से धोपेश्वरनाथ का सम्बंध कैंट क्षेत्र के सदर बाजार में स्थित धोपेश्वरनाथ मंदिर का इतिहास लगभग 5000 वर्ष पुराना है, जो इसे महाभारत काल से जोड़ता है। कहा जाता है कि धूम्र ऋषि ने यहां कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए। धूम्र ऋषि की समाधि के ऊपर स्थापित शिवलिंग को "धूम्रेश्वरनाथ" कहा गया, जो बाद में "धोपेश्वरनाथ" के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यह मंदिर अपनी अलौकिक शक्ति और पांडवकालीन इतिहास के लिए जाना जाता है। पशुपतिनाथ तरह बना मंदिर पीलीभीत बाईपास स्थित पशुपतिनाथ मंदिर नेपाल के काठमांडू स्थित प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर की तर्ज पर बनाया गया है। इसका निर्माण लगभग 22 वर्ष पूर्व समाजसेवी जगमोहन सिंह ने करवाया था। मंदिर परिसर में एक तालाब के मध्य में मुख्य शिवलिंग स्थापित है, साथ ही 108 छोटे-छोटे शिवलिंग भी हैं। मंदिर की वास्तुकला और सुंदरता श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।
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